श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.269.41 
स्यूमरश्मिरुवाच
स्यूमरश्मिरहं ब्रह्मन् जिज्ञासार्थमिहागत:।
श्रेयस्काम: प्रत्यवोचमार्जवान्न विवक्षया॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
सुमेरश्मि बोले - ब्रह्मन् ! मेरा नाम सुमेरश्मि है । मैं ज्ञान प्राप्ति की इच्छा से यहाँ आया हूँ । मैंने अपने वचन आपके समक्ष केवल कल्याण की भावना से प्रस्तुत किए हैं, वाद-विवाद की इच्छा से नहीं ॥41॥
 
Sumerashmi said - Brahman! My name is Sumerashmi. I have come here with the desire to acquire knowledge. I have presented my words to you with a simple intention of welfare, not with the desire to debate.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)