श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.269.37 
फलवन्ति च कर्माणि व्युष्टिमन्ति ध्रुवाणि च।
विगुणानि च पश्यन्ति तथानैकान्तिकानि च॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
योगशास्त्र में वर्णित कर्म वे हैं जो श्रेष्ठ फल देने वाले, उन्नति करने वाले और स्थायी हैं; फिर भी जीवन पथ पर चलने वाले लोग उन्हें गुणहीन (निष्फल) और अस्थिर मानते हैं।
 
The actions mentioned in Yoga Shastra are those which give best results, lead to progress and are permanent; Yet people who follow the path of life consider them to be devoid of qualities (ineffectual) and unstable.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)