श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.269.30 
अनुत्तरीयवसनमनुपस्तीर्णशायिनम्।
बाहूपधानं शाम्यन्तं तं देवा ब्राह्मणं विदु:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो केवल एक लंगोटी ही वस्त्र धारण करता है, जिसके पास ओढ़ने के लिए चादर भी नहीं है, जो बिना बिस्तर के सोता है, अपनी भुजाओं को तकिया बनाकर रखता है तथा सदैव शान्त रहता है, उसे देवता ब्राह्मण मानते हैं।
 
He who has only a loincloth as clothing, does not even have a sheet to cover himself, who sleeps without a bed, uses his arms as a pillow and is always calm, he is considered a Brahmin by the gods. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)