श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.269.28 
द्वाराणि यस्य सर्वाणि सुगुप्तानि मनीषिण:।
उपस्थमुदरं बाहू वाक् चतुर्थी स वै द्विज:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जिस बुद्धिमान पुरुष की जननेन्द्रिय, उदर, हाथ, पैर और वाणी सभी पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं, वही सच्चा ब्राह्मण है।
 
The wise man whose genitals, abdomen, hands, feet and speech are all fully protected is a true Brahmin. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)