श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.269.15 
अर्चिष्मन्तो बर्हिषद: कव्यादा: पितरस्तथा।
मृतस्याप्यनुमन्यन्ते मन्त्रान् मन्त्राश्च कारणम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अर्चिष्मत्, बर्हिषद् और कव्यवाह संज्ञक पितर भी मृत व्यक्ति की (सुख, शांति और प्रसन्नता) के लिए मंत्र जप की अनुमति देते हैं। मंत्र ही सभी धर्मों का कारण हैं। 15॥
 
Archishmat, Barhishad and Kavyavah Sangyak ancestors also allow recitation of mantra for the (happiness, peace and happiness) of the deceased person. Mantras are the reason for all religions. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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