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mahabharat 12.268.9: उस समय सुमेरश्मि नामक ऋषि ने गौ में प्रवेश करके कपिल मुनि से कहा - 'हे! यदि आप वेदों की प्रामाणिकता पर संदेह करते हैं, तो अन्य धर्मग्रन्थों को किस आधार पर प्रामाणिक माना जा सकता है?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.268.9 
तां गामृषि: स्यूमरश्मि: प्रविश्य यतिमब्रवीत्।
हंहो वेदा३ यदि मता धर्मा: केनापरे मता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस समय सुमेरश्मि नामक ऋषि ने गौ में प्रवेश करके कपिल मुनि से कहा - 'हे! यदि आप वेदों की प्रामाणिकता पर संदेह करते हैं, तो अन्य धर्मग्रन्थों को किस आधार पर प्रामाणिक माना जा सकता है?॥9॥
 
At that time a sage named Sumerashmi entered the cow and said to Kapil Muni - 'Oh! If you doubt the authenticity of the Vedas, then on what basis can other religious texts be considered authentic?॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)