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mahabharat 12.268.29: सभी लोग मिलकर पुरोहित और दक्षिणा सहित यज्ञ संपन्न करते हैं। यजमान ये सारी चीज़ें इकट्ठा करता है और फिर यज्ञ संपन्न करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.268.29 
यज्ञं वहन्ति सम्भूय सहर्त्विग्भि: सदक्षिणै:।
संहृत्यैतानि सर्वाणि यज्ञं निर्वर्तयन्त्युत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सभी लोग मिलकर पुरोहित और दक्षिणा सहित यज्ञ संपन्न करते हैं। यजमान ये सारी चीज़ें इकट्ठा करता है और फिर यज्ञ संपन्न करता है।
 
All of them together perform the yajna along with the priest and the dakshina. The host collects all these things and then performs the yajna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)