श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.267.5 
द्युमत्सेन उवाच
अथ चेदवधो धर्मोऽधर्म: को जातु चिद् भवेत्।
दस्यवश्चेन्न हन्येरन् सत्यवन् संकरो भवेत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
द्युमत्सेन ने कहा, "बेटा सत्यवान्! यदि अपराधी को न मारना कभी धर्म है, तो फिर अधर्म क्या हो सकता है? यदि चोर-लुटेरों को न मारा जाए, तो लोगों में जाति-धर्म का मिश्रण फैल जाएगा।"
 
Dyumatsena said, "Son Satyavan! If not killing a criminal is sometimes a dharma, then what can be adharma? If thieves and robbers are not killed, then mixing of castes and religions will spread among the people. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)