श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.267.36 
सत्याय हि यथा नेह जह्याद् धर्मफलं महत्।
भूतानामनुकम्पार्थं मनु: स्वायम्भुवोऽब्रवीत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
स्वायम्भु मनु ने जीवों पर दया करने के लिए धर्म का उपदेश दिया है, जिससे वे इस संसार में धर्म के उस महान फल से वंचित न रहें, जो उन्हें ईश्वर के सच्चे स्वरूप की प्राप्ति कराता है।' 36॥
 
'Swayambhu Manu has preached Dharma to show kindness to the living beings, so that in this world they are not deprived of the great fruit of Dharma which leads to attaining the true form of God.' 36॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि द्युमत्सेनसत्यवत्संवादे सप्तषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवादविषयक दो सौ सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)