श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.267.33 
पादोनेनापि धर्मेण गच्छेत् त्रेतायुगे तथा।
द्वापरे तु द्विपादेन पादेन त्वधरे युगे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
त्रेता युग आने पर धर्म का प्रचार एक-चौथाई रह जाता है, द्वापर में धर्म के केवल दो पैर रह जाते हैं; किन्तु कलियुग में धर्म का केवल एक-चौथाई भाग ही रह जाता है।
 
‘When Treta Yuga arrives, the propagation of Dharma reduces by one-fourth, in Dwapar only two legs of Dharma remain; but in Kali Yuga only one-fourth of Dharma remains.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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