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श्लोक 12.267.33  |
पादोनेनापि धर्मेण गच्छेत् त्रेतायुगे तथा।
द्वापरे तु द्विपादेन पादेन त्वधरे युगे॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| त्रेता युग आने पर धर्म का प्रचार एक-चौथाई रह जाता है, द्वापर में धर्म के केवल दो पैर रह जाते हैं; किन्तु कलियुग में धर्म का केवल एक-चौथाई भाग ही रह जाता है। |
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| ‘When Treta Yuga arrives, the propagation of Dharma reduces by one-fourth, in Dwapar only two legs of Dharma remain; but in Kali Yuga only one-fourth of Dharma remains. |
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