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mahabharat 12.267.30: जहाँ नीच पापियों को महान दुःख नहीं भोगना पड़ता, वहाँ अवश्य ही पाप बढ़ जाते हैं और पुण्य क्षीण हो जाता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.267.30 
यत्र वै पापकृन्नीचो न महद् दु:खमर्च्छति।
वर्धन्ते तत्र पापानि धर्मो ह्रसति च ध्रुवम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ नीच पापियों को महान दुःख नहीं भोगना पड़ता, वहाँ अवश्य ही पाप बढ़ जाते हैं और पुण्य क्षीण हो जाता है ॥30॥
 
Where the lowly sinners do not have to suffer great misery, there certainly sins increase and virtue diminishes. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)