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mahabharat 12.267.28: यदि कोई मनुष्य अभिमान या मोहवश राजा के साथ किंचित भी अनुचित व्यवहार करे, तो उसे हर प्रकार से दबा देना चाहिए। ऐसा करने से वह पापकर्मों से दूर हो जाएगा॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.267.28 
यो राज्ञो दम्भमोहेन किंचित् कुर्यादसाम्प्रतम्।
सर्वोपायैर्नियम्य: स तथा पापान्निवर्तते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई मनुष्य अभिमान या मोहवश राजा के साथ किंचित भी अनुचित व्यवहार करे, तो उसे हर प्रकार से दबा देना चाहिए। ऐसा करने से वह पापकर्मों से दूर हो जाएगा॥ 28॥
 
If a person, out of pride or attachment, behaves in the slightest way inappropriately with the king, he should be suppressed by all means. By doing so, he will move away from sinful acts.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)