श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.267.25 
वित्रास्यमाना: सुकृतो न कामाद्‍घ्नन्ति दुष्कृतीन्।
सुकृतेनैव राजानो भूयिष्ठं शासते प्रजा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब प्रजा में दण्ड का भय उत्पन्न हो जाता है, तब वह सत्कर्मों में प्रवृत्त हो जाती है; अतः दण्ड का उद्देश्य प्रजा को भय दिखाकर धर्म का पालन कराना है, किसी का प्राण लेना नहीं। राजा अपनी इच्छा से दुष्टों का वध नहीं करते। श्रेष्ठ राजा प्रायः सत्कर्मों और सद्व्यवहार के कारण ही प्रजा पर दीर्घकाल तक शासन करते हैं॥ 25॥
 
When the fear of punishment is created in the subjects, then they become devoted to good deeds; hence the purpose of punishment is to make the subjects follow Dharma by showing fear, not to take anyone's life. Kings do not kill the wicked at will. The best kings usually rule over the subjects for a long time by virtue of good deeds and good behavior.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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