Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.267.16: यदि कोई व्यक्ति बार-बार अपराध करता है, तो श्रेष्ठ विचारकों को उसके अपराध के लिए कठोर दंड देना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे पहली बार की तरह दंड दिए बिना नहीं छोड़ा जा सकता।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.267.16 
गरीयांसो गरीयांसमपराधे पुन: पुन:।
तदा विसर्गमर्हन्त न यथा प्रथमे तथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति बार-बार अपराध करता है, तो श्रेष्ठ विचारकों को उसके अपराध के लिए कठोर दंड देना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे पहली बार की तरह दंड दिए बिना नहीं छोड़ा जा सकता।॥16॥
 
If a person commits a crime repeatedly, then the leading thinkers should award a severe punishment for his crime. In such a situation, he cannot be let go without punishment like he did for the first time.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)