Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.267.14-15: यदि कोई डाकू या दुष्ट व्यक्ति शरणागत होकर किसी पुरोहित के पास जाकर यह प्रतिज्ञा करे कि 'ब्राह्मण! अब हम ऐसा पाप फिर कभी नहीं करेंगे', तो उसे छोड़ देना चाहिए। यह ब्रह्माजी का उपदेश है। सिर मुंडाए, दण्ड धारण करने वाला और मृगचर्म धारण करने वाला संन्यासी ब्राह्मण भी यदि पाप करे, तो दण्ड का भागी होता है। 14-15. | mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा पुरोहितं वा ते पर्येयु: शरणैषिण:।
करिष्याम: पुनर्ब्रह्मन् न पापमिति वादिन:॥ १४॥
तदा विसर्गमर्हा: स्युरितीदं धातृशासनम्।
बिभ्रद् दण्डाजिनं मुण्डो ब्राह्मणोऽर्हति शासनम्॥ १५॥
अनुवाद
यदि कोई डाकू या दुष्ट व्यक्ति शरणागत होकर किसी पुरोहित के पास जाकर यह प्रतिज्ञा करे कि 'ब्राह्मण! अब हम ऐसा पाप फिर कभी नहीं करेंगे', तो उसे छोड़ देना चाहिए। यह ब्रह्माजी का उपदेश है। सिर मुंडाए, दण्ड धारण करने वाला और मृगचर्म धारण करने वाला संन्यासी ब्राह्मण भी यदि पाप करे, तो दण्ड का भागी होता है। 14-15.
If a robber or a wicked man seeking refuge goes to a priest and vows that 'Brahmin! Now we will not commit such a sin again', then he should be let go. This is the advice of Brahmaji. Even a sanyasi Brahmin who has shaven head, carries a staff and wears a deerskin, if he commits a sin, deserves to be punished. 14-15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥