श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.267.11 
असाधुश्चैव पुरुषो लभते शीलमेकदा।
साधोश्चापि ह्यसाधुभ्य: शोभना जायते प्रजा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
संतों की संगति से कभी-कभी दुष्ट मनुष्य भी सुधर जाता है और सुचारु हो जाता है; और बहुत से दुष्टों की सन्तान भी अच्छी हो जाती है ॥11॥
 
Even an evil man sometimes reforms and becomes well behaved through the company of saints; and the children of many evil men also turn out to be good. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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