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mahabharat 12.265.11-12: वेदों में वर्णित यज्ञ-सम्बन्धी वृक्षों का ही यज्ञ में प्रयोग करना चाहिए। उत्तम आचरण और शुद्ध विचारों वाला महापुरुष अपनी शुद्ध भावनाओं से जो हविष्य या नैवेद्य तैयार करता है और प्रोक्षण आदि द्वारा उत्तम अनुष्ठान करता है, वह सब देवताओं को अर्पण करने योग्य है। 11-12॥   |   mahabharat अध्याय 12.265: राजा विचख्नुके द्वारा अहिंसा-धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 265: राजा विचख्नुके द्वारा अहिंसा-धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  12.265.11-12 
यज्ञियाश्चैव ये वृक्षा वेदेषु परिकल्पिता:॥ ११॥
यच्चापि किंचित् कर्तव्यमन्यच्चोक्षै: सुसंस्कृतम्।
महासत्त्वै: शुद्धभावै: सर्वं देवार्हमेव तत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वेदों में वर्णित यज्ञ-सम्बन्धी वृक्षों का ही यज्ञ में प्रयोग करना चाहिए। उत्तम आचरण और शुद्ध विचारों वाला महापुरुष अपनी शुद्ध भावनाओं से जो हविष्य या नैवेद्य तैयार करता है और प्रोक्षण आदि द्वारा उत्तम अनुष्ठान करता है, वह सब देवताओं को अर्पण करने योग्य है। 11-12॥
 
The trees related to Yagya mentioned in the Vedas should be used in Yagya. Whatever Havishya or Naiveda, which a great man of good conduct and pure thoughts prepares with his pure feelings and performs good rituals through Prokshana etc., is worthy of being offered to all the Gods. 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)