भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर ! इस प्रकार तुलाधार वैश्य सदैव उन धर्मों की प्रशंसा करते थे जो अहिंसक, विवेकपूर्ण और श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा सेवित हों ॥44-45॥
Bhishma says - Yudhishthira! In this way, Tuladhar Vaishya always praised those religions which are non-violent, reasonable and served by noble men. ॥ 44-45॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि तुलाधारजाजलिसंवादे त्रिषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें तुलाधार और जाजलिका संवादविषयक दो सौ तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥