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यानि यज्ञेष्विहेज्यन्ति सदा प्राज्ञा द्विजर्षभा:।
तेन ते देवयानेन पथा यान्ति महामुने॥ ३०॥
अनुवाद
महामुने! श्रेष्ठ विद्वान ब्राह्मण सदैव यज्ञों में प्रयुक्त होने वाले पदार्थों को ग्रहण करते हैं, उन्हीं के द्वारा वे दिव्य मार्ग से पुण्य लोकों को जाते हैं ॥30॥
Mahamune! The best learned brahmins always take the substances which they use in the yagyas, through them they go to the virtuous worlds through the divine path. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥