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अकारणो हि नैवास्ति धर्म: सूक्ष्मो हि जाजले।
भूतभव्यार्थमेवेह धर्मप्रवचनं कृतम्॥ ३५॥
अनुवाद
जाजले! कोई भी धर्म उद्देश्यहीन या निष्फल नहीं है, उसका स्वरूप अत्यंत सूक्ष्म है, यहाँ धर्म को स्वर्ग या ब्रह्म की प्राप्ति के लिए ही बताया गया है।
Jaajle! No religion is without purpose or fruitless, its nature is extremely subtle, religion has been explained here only for the attainment of heaven or Brahman.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥