श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 260: युधिष्ठिरका धर्मकी प्रामाणिकतापर संदेह उपस्थित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.260.19 
येनैवान्य: प्रभवति सोऽपरानपि बाधते।
आचाराणामनैकाग्रॺं सर्वेषामुपलक्षयेत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जिस धर्म से एक व्यक्ति उन्नति करता है, उसी धर्म से दूसरा व्यक्ति दूसरों को दुःख पहुँचाता है; इसलिए कोई भी सबके प्रति एकरूप आचरण नहीं कर सकता॥19॥
 
The same religion by which one person prospers, another person causes pain to others; hence no one can show uniformity of conduct for everyone.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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