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mahabharat 12.260.16: उन दिनों लोग प्रायः स्वार्थवश धर्म करते देखे जाते हैं। सज्जनों का सच्चा धर्म मूर्खों की दृष्टि में शीघ्र ही बकवास के अतिरिक्त कुछ नहीं जान पड़ता। वे मूर्ख उन धार्मिक पुरुषों को पागल कहते हैं और उनका उपहास करते हैं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.260: युधिष्ठिरका धर्मकी प्रामाणिकतापर संदेह उपस्थित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 260: युधिष्ठिरका धर्मकी प्रामाणिकतापर संदेह उपस्थित करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.260.16 
धर्मो भवति स क्षिप्रं प्रलापस्त्वेव साधुषु।
अथैतानाहुरुन्मत्तानपि चावहसन्त्युत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों लोग प्रायः स्वार्थवश धर्म करते देखे जाते हैं। सज्जनों का सच्चा धर्म मूर्खों की दृष्टि में शीघ्र ही बकवास के अतिरिक्त कुछ नहीं जान पड़ता। वे मूर्ख उन धार्मिक पुरुषों को पागल कहते हैं और उनका उपहास करते हैं॥16॥
 
In those days, people are often seen to be practicing religion with selfish motives. The true religion of noble men is soon found to be nothing more than nonsense in the eyes of foolish people. Those fools call those religious men mad and make fun of them.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)