Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.260.13: जब धर्म की निन्दा की जाती है, तब वह पहले गंधर्वनाग के समान प्रतीत होता है; फिर जब विद्वानों द्वारा उसका विशेष रूप से विचार किया जाता है, तब वह अदृश्य हो गया प्रतीत होता है ॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.260: युधिष्ठिरका धर्मकी प्रामाणिकतापर संदेह उपस्थित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब धर्म की निन्दा की जाती है, तब वह पहले गंधर्वनाग के समान प्रतीत होता है; फिर जब विद्वानों द्वारा उसका विशेष रूप से विचार किया जाता है, तब वह अदृश्य हो गया प्रतीत होता है ॥13॥
When religion is criticised, it first appears like a Gandharvanagara; then, when it is specifically considered by the learned, it appears to have become invisible. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥