विधाता ने धन की रचना केवल यज्ञ के लिए की है और मनुष्य को यज्ञ के लिए उसकी रक्षा करने के लिए उत्पन्न किया है। अतः समस्त धन का उपयोग यज्ञ के लिए ही करना चाहिए। धन का भोग-विलास में उपयोग न तो लाभदायक है और न ही कल्याणकारी। 25॥
‘The Creator has created wealth only for the Yagya and has created man to protect it for the Yagya. Therefore, all the money should be used only for yagya. Using money for enjoyment is neither beneficial nor good. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥