Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.259.22: जो व्यक्ति स्वयं जीवित रहना चाहता है, वह दूसरों के प्राण कैसे ले सकता है? जो सुख-सुविधाएँ मनुष्य अपने लिए चाहता है, उसे दूसरों को भी उपलब्ध कराने के बारे में सोचना चाहिए ॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 12.259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीवितुं य: स्वयं चेच्छेत् कथं सोऽन्यं प्रघातयेत्।
यद् यदात्मनि चेच्छेत तत् परस्यापि चिन्तयेत्॥ २२॥
अनुवाद
जो व्यक्ति स्वयं जीवित रहना चाहता है, वह दूसरों के प्राण कैसे ले सकता है? जो सुख-सुविधाएँ मनुष्य अपने लिए चाहता है, उसे दूसरों को भी उपलब्ध कराने के बारे में सोचना चाहिए ॥ 22॥
How can a person who wants to stay alive himself take the lives of others? Whatever comforts and facilities a person wants for himself, he should think about making them available to others as well. ॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥