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mahabharat 12.259.16: गाँव में आए हुए हिरण की तरह चोर भी सब लोगों से डरता है। वह दूसरों के साथ किए गए अपने ही समान पापी को दूसरों को समझता है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.259.16 
सर्वत: शङ्कते स्तेनो मृगो ग्राममिवेयिवान्।
बहुधाऽऽचरितं पापमन्यत्रैवानुपश्यति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गाँव में आए हुए हिरण की तरह चोर भी सब लोगों से डरता है। वह दूसरों के साथ किए गए अपने ही समान पापी को दूसरों को समझता है॥16॥
 
Like a deer that comes to a village, a thief is afraid of everyone. He considers others to be as sinful as he has committed with others.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)