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mahabharat 12.259.11: क्रूर स्वभाव वाले पापी भी अलग-अलग सत्य की शपथ लेकर विश्वासघात या परस्पर विवाद से बचे रहते हैं। इतना ही नहीं, वे सत्य का आश्रय लेकर सत्य का आह्वान करते हुए अपने-अपने कार्यों में लग जाते हैं॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.259.11 
अपि पापकृतो रौद्रा: सत्यं कृत्वा पृथक् पृथक्।
अद्रोहमविसंवादं प्रवर्तन्ते तदाश्रया:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
क्रूर स्वभाव वाले पापी भी अलग-अलग सत्य की शपथ लेकर विश्वासघात या परस्पर विवाद से बचे रहते हैं। इतना ही नहीं, वे सत्य का आश्रय लेकर सत्य का आह्वान करते हुए अपने-अपने कार्यों में लग जाते हैं॥ 11॥
 
Even sinners with a cruel nature remain safe from treachery or disputes among themselves by taking oath of truth separately. Not only this, they take shelter of truth and engage in their respective activities by invoking truth.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)