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mahabharat 12.258.8: हे महेश्वर! मैं चाहता हूँ कि आप मेरी एक इच्छा पूरी करें। मैं कहीं जाकर आपको प्रसन्न करने के लिए तपस्या करना चाहता हूँ।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.258.8 
एतदिच्छाम्यहं कामं त्वत्तो लोकपितामह।
इच्छेयं त्वत्प्रसादार्थं तपस्तप्तुं महेश्वर॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे महेश्वर! मैं चाहता हूँ कि आप मेरी एक इच्छा पूरी करें। मैं कहीं जाकर आपको प्रसन्न करने के लिए तपस्या करना चाहता हूँ।॥8॥
 
‘Lord Maheshwar! I want you to fulfill one of my desires. I wish to go somewhere and do penance to please you.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)