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mahabharat 12.258.4: हे समस्त प्राणियों के स्वामी! मैं अबोध बालक, वृद्ध तथा बालकों के प्राण नहीं लेता। आपको नमस्कार है, आप मुझ पर प्रसन्न हों॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.258.4 
बालान् वृद्धान् वयस्थांश्च न हरेयमनागस:।
प्राणिन: प्राणिनामीश नमस्तेऽस्तु प्रसीद मे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे समस्त प्राणियों के स्वामी! मैं अबोध बालक, वृद्ध तथा बालकों के प्राण नहीं लेता। आपको नमस्कार है, आप मुझ पर प्रसन्न हों॥4॥
 
'Lord of all living beings! I will not take the lives of innocent children, old and young beings. Salutations to you, may you be pleased with me.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)