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mahabharat 12.258.39: राजसिंह! जैसे जाग्रत अवस्था के अंत में गहरी नींद के समय इन्द्रियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं और लुप्त हो जाती हैं तथा जाग्रत अवस्था आने पर पुनः आ जाती हैं, उसी प्रकार जीवन के अंत में सभी जीव अपने-अपने कर्मों के अनुसार परलोक में जाते हैं, देवताओं के समान बनते हैं या नरक में जाते हैं और अपने कर्मों के क्षीण हो जाने पर पुनः इसी लोक में आकर मनुष्य आदि अन्य योनियों में जन्म लेते हैं॥39॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.258.39 
सर्वे देवा: प्राणिनां प्राणनान्ते
गत्वा वृत्ता: संनिवृत्तास्तथैव।
एवं सर्वे मानवा: प्राणनान्ते
गत्वा वृत्ता देववद् राजसिंह॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
राजसिंह! जैसे जाग्रत अवस्था के अंत में गहरी नींद के समय इन्द्रियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं और लुप्त हो जाती हैं तथा जाग्रत अवस्था आने पर पुनः आ जाती हैं, उसी प्रकार जीवन के अंत में सभी जीव अपने-अपने कर्मों के अनुसार परलोक में जाते हैं, देवताओं के समान बनते हैं या नरक में जाते हैं और अपने कर्मों के क्षीण हो जाने पर पुनः इसी लोक में आकर मनुष्य आदि अन्य योनियों में जन्म लेते हैं॥39॥
 
Rajsingh! Just as the senses become inactive at the time of deep sleep at the end of the waking state and disappear and come back again when the waking state comes, in the same way, at the end of life, all living beings go to the other world according to their deeds, become equal to gods or go to hell and after their deeds fade away, they return to this world and take birth again in other forms like human beings. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)