Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.258.37: तब मृत्यु नाम की स्त्री ने शाप के भय से ब्रह्माजी से कहा, ‘बहुत अच्छा, मैं आपकी आज्ञा स्वीकार करती हूँ।’ वही मृत्यु जब किसी प्राणी का अन्त समय आता है, तब उसे काम और क्रोध को भड़काकर उसके द्वारा उसे मूर्च्छित करके मार डालती है। ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.258.37 
सा वै तदा मृत्युसंज्ञापदेशा
भीता शापाद् बाढमित्यब्रवीत् तम्।
अथो प्राणान् प्राणिनामन्तकाले
कामक्रोधौ प्राप्य निर्मोह्य हन्ति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तब मृत्यु नाम की स्त्री ने शाप के भय से ब्रह्माजी से कहा, ‘बहुत अच्छा, मैं आपकी आज्ञा स्वीकार करती हूँ।’ वही मृत्यु जब किसी प्राणी का अन्त समय आता है, तब उसे काम और क्रोध को भड़काकर उसके द्वारा उसे मूर्च्छित करके मार डालती है। ॥37॥
 
Then the woman named Mrityu, fearing the curse, said to Brahmaji, 'Very well, I accept your command.' That very Mrityu, when the end of a creature comes, instigates them to have lust and anger and through them puts them in a trance and kills them. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)