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mahabharat 12.258.35: ‘सम्पूर्ण प्राणियों के अन्त के समय काम और क्रोध को एक साथ नियुक्त कर लो। इस प्रकार तुम अथाह पुण्य को प्राप्त करोगे और पाप नहीं करोगे; क्योंकि तुम्हारा मन सम (राग-द्वेष से रहित) है।॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.258.35 
सर्वेषां त्वं प्राणिनामन्तकाले
कामक्रोधौ सहितौ योजयेथा:।
एवं धर्मस्त्वामुपैष्यत्यमेयो
न चाधर्मं लप्स्यसे तुल्यवृत्ति:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘सम्पूर्ण प्राणियों के अन्त के समय काम और क्रोध को एक साथ नियुक्त कर लो। इस प्रकार तुम अथाह पुण्य को प्राप्त करोगे और पाप नहीं करोगे; क्योंकि तुम्हारा मन सम (राग-द्वेष से रहित) है।॥ 35॥
 
‘At the time of the end of all beings, you should appoint lust and anger together. In this way you will attain unfathomable virtue and you will not commit any sin; because your mind is balanced (devoid of love and hatred).॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)