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mahabharat 12.258.28: मृत्यु! तुम इन लोगों को मार डालो। शुभ! ऐसा करने से तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा। भद्रे! यहाँ मेरी कही कोई भी बात झूठी नहीं हो सकती।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.258.28 
अधर्मो नास्ति ते मृत्यो संयच्छेमा: प्रजा: शुभे।
मया ह्युक्तं मृषा भद्रे भविता नेह किंचन॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मृत्यु! तुम इन लोगों को मार डालो। शुभ! ऐसा करने से तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा। भद्रे! यहाँ मेरी कही कोई भी बात झूठी नहीं हो सकती।॥28॥
 
‘Mrityo! You kill these people. Shubh! You will not commit any sin by doing this. Bhadre! Nothing that I say here can be false.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)