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श्लोक 12.258.26  |
ततोऽब्रवीत् पुनर्मृत्युर्भगवन्तं पितामहम्।
न हरेयं प्रजा देव पुनश्चाहं प्रसादये॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| तब मृत्यु ने पुनः भगवान पितामह से कहा - 'प्रभु! मैं प्रजा का विनाश नहीं कर सकती। इसके लिए मैं पुनः आपका आशीर्वाद चाहती हूँ।'॥26॥ |
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| Then death again said to the Lord Pitamaha - 'Lord! I cannot destroy the people. For this I want your blessings again.'॥ 26॥ |
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