श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.258.26 
ततोऽब्रवीत् पुनर्मृत्युर्भगवन्तं पितामहम्।
न हरेयं प्रजा देव पुनश्चाहं प्रसादये॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तब मृत्यु ने पुनः भगवान पितामह से कहा - 'प्रभु! मैं प्रजा का विनाश नहीं कर सकती। इसके लिए मैं पुनः आपका आशीर्वाद चाहती हूँ।'॥26॥
 
Then death again said to the Lord Pitamaha - 'Lord! I cannot destroy the people. For this I want your blessings again.'॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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