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mahabharat 12.258.20-21h: हे राजन! तत्पश्चात् उन्होंने मौन व्रत धारण कर लिया। हे पृथ्वी के स्वामी! तत्पश्चात् उन्होंने आठ हजार वर्षों तक जल में रहकर तपस्या की।   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  12.258.20-21h 
पुनरेव ततो राजन् मौनमातिष्ठदुत्तमम्॥ २०॥
अप्सु वर्षसहस्राणि सप्त चैकं च पार्थिव।
 
 
अनुवाद
हे राजन! तत्पश्चात् उन्होंने मौन व्रत धारण कर लिया। हे पृथ्वी के स्वामी! तत्पश्चात् उन्होंने आठ हजार वर्षों तक जल में रहकर तपस्या की।
 
King! Thereafter he took a great vow of silence. O lord of the earth! Then he performed penance by staying in water for eight thousand years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)