Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.256.9: राजा अकम्पन अब स्वतंत्र शासक न रहकर शत्रुओं के अधीन हो गए थे और पुत्रशोक में डूबे हुए थे। वे शांति का मार्ग खोज रहे थे। इसी बीच भगवान की कृपा से उन्हें पृथ्वी पर विचरण करते हुए नारद मुनि दिखाई दिए॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राजा शत्रुवशग: पुत्रशोकसमन्वित:।
यदृच्छया शान्तिपरो ददर्श भुवि नारदम्॥ ९॥
अनुवाद
राजा अकम्पन अब स्वतंत्र शासक न रहकर शत्रुओं के अधीन हो गए थे और पुत्रशोक में डूबे हुए थे। वे शांति का मार्ग खोज रहे थे। इसी बीच भगवान की कृपा से उन्हें पृथ्वी पर विचरण करते हुए नारद मुनि दिखाई दिए॥9॥
King Akampan, no longer an independent ruler, became subject to the enemy and was drowned in the grief of his son. He was searching for a way to find peace. Meanwhile, by the grace of God, he saw sage Narada roaming on the earth.॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥