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mahabharat 12.256.18: जब पितामह ब्रह्मा क्रोधित हुए, तो उनके क्रोध के प्रचण्ड वेग से समस्त चराचर प्राणी जलने लगे।   |   mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.256.18 
तत्रादह्यन्त भूतानि जङ्गमानि ध्रुवाणि च।
महता क्रोधवेगेन कुपिते प्रपितामहे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब पितामह ब्रह्मा क्रोधित हुए, तो उनके क्रोध के प्रचण्ड वेग से समस्त चराचर प्राणी जलने लगे।
 
When Grandfather Brahma became angry, all living and movable beings started burning due to the great speed of his anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)