श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.255.6 
वायोरनियमस्पर्शो वादस्थानं स्वतन्त्रता।
बलं शैघ्र्यं च मोक्षं च कर्म चेष्टाऽऽत्मता भव:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अनिश्‍चित स्पर्श, वाणी इन्द्रिय की स्थिति, गति आदि की स्वतन्त्रता, बल, गति की तीव्रता, मल-मूत्र आदि को शरीर से बाहर निकालना, प्रक्षेप आदि क्रियाएँ, क्रिया-शक्ति, जीवन और जन्म-मृत्यु - ये सब वायु के गुण हैं ॥6॥
 
Indefinite touch, state of the sense of speech, freedom of movement etc., strength, quickness of movement, expelling excreta, urine etc. from the body, actions like projection etc., action-power, life and birth-death - all these are the qualities of Vayu. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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