| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन » श्लोक 5 |
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| | | | श्लोक 12.255.5  | अग्नेर्दुर्धर्षता ज्योतिस्ताप: पाक: प्रकाशनम्।
शोको रागो लघुस्तैक्ष्ण्यं सततं चोर्ध्वभासिता॥ ५॥ | | | | | | अनुवाद | | प्रचण्ड होना, जलाना, गर्मी देना, पकाना, प्रकाश देना, शोक, राग, तेज, तीक्ष्णता तथा सदैव ऊपर की ओर उठती हुई तथा प्रकाशित होने वाली ज्वालाएँ - ये सब अग्नि के गुण हैं ॥5॥ | | | | Being fierce, burning, giving heat, cooking, giving light, grief, passion, lightness, sharpness and the flames always rising upwards and being illuminated - all these are the qualities of Agni. ॥5॥ | | ✨ ai-generated | | |
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