श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.255.11 
युधिष्ठिर उवाच
कथं पञ्चगुणा बुद्धि: कथं पञ्चेन्द्रिया गुणा:।
एतन्मे सर्वमाचक्ष्व सूक्ष्मज्ञानं पितामह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! बुद्धि के गुण पाँच ही कैसे हैं? और पाँच इन्द्रियाँ भी तत्वों के गुण कैसे हो सकती हैं? कृपया मुझे यह सब सूक्ष्म ज्ञान बताइए॥ 11॥
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! How come there are only five qualities of the intellect? And how can the five senses also be the qualities of elements? Please tell me all this subtle knowledge.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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