Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.253.7: उन योगियों का आत्मा का सनातन स्वरूप सदैव सात सूक्ष्म गुणों (महत्तत्त्व, अहंकार और पाँच तन्मात्राओं) से युक्त रहता है और अविनाशी देवताओं की भाँति प्रतिदिन विचरण करता रहता है॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.253: स्थूल, सूक्ष्म और कारण-शरीरसे भिन्न जीवात्माका और परमात्माका योगके द्वारा साक्षात्कार करनेका प्रकार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषां नित्यं सदा नित्यो भूतात्मा सततं गुणै:।
सप्तभिस्त्वन्वित: सूक्ष्मैश्चरिष्णुरजरामर:॥ ७॥
अनुवाद
उन योगियों का आत्मा का सनातन स्वरूप सदैव सात सूक्ष्म गुणों (महत्तत्त्व, अहंकार और पाँच तन्मात्राओं) से युक्त रहता है और अविनाशी देवताओं की भाँति प्रतिदिन विचरण करता रहता है॥7॥
The eternal form of the soul of those yogis is always filled with seven subtle qualities (mahattattva, ego and five tanmatras) and keeps moving around daily like immortal gods. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥