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mahabharat 12.253.2: जैसे सूर्य की किरणें एक साथ सर्वत्र भ्रमण करती हैं और स्थिर अवस्था में दिखाई देती हैं, वैसे ही अलौकिक आत्मा स्थूल शरीर को छोड़कर समस्त लोकों में जाती है। (यह केवल ज्ञान-दृष्टि से ही जाना जा सकता है।)॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.253: स्थूल, सूक्ष्म और कारण-शरीरसे भिन्न जीवात्माका और परमात्माका योगके द्वारा साक्षात्कार करनेका प्रकार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 253: स्थूल, सूक्ष्म और कारण-शरीरसे भिन्न जीवात्माका और परमात्माका योगके द्वारा साक्षात्कार करनेका प्रकार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.253.2 
यथा मरीच्य: सहिताश्चरन्ति
सर्वत्र तिष्ठन्ति च दृश्यमाना:।
देहैर्विमुक्तानि चरन्ति लोकां-
स्तथैव सत्त्वान्यतिमानुषाणि॥ २॥
 
 
अनुवाद
जैसे सूर्य की किरणें एक साथ सर्वत्र भ्रमण करती हैं और स्थिर अवस्था में दिखाई देती हैं, वैसे ही अलौकिक आत्मा स्थूल शरीर को छोड़कर समस्त लोकों में जाती है। (यह केवल ज्ञान-दृष्टि से ही जाना जा सकता है।)॥2॥
 
Just as the rays of the sun travel everywhere together and are visible in a stable state, similarly the supernatural soul leaves the physical body and goes to all the worlds. (This can be known only through the vision of knowledge.)॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)