श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.25.26 
सुखं वा यदि वा दु:खं प्रियं वा यदि वाप्रियम्।
प्राप्तं प्राप्तमुपासीत हृदयेनापराजित:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
चाहे सुख हो या दुःख, चाहे प्रिय हो या अप्रिय, जो कुछ भी मिले, उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करो। उसके सामने मन से हार मत मानो (हिम्मत मत हारो)॥26॥
 
‘Whether it is happiness or sorrow, pleasant or unpleasant, whatever is received, accept it gladly. Do not accept defeat in front of it from your heart (do not lose courage)॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)