| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 247: महाभूतादि तत्त्वोंका विवेचन » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 12.247.3  | भूमिरापस्तथा ज्योतिर्वायुराकाश एव च।
महाभूतानि भूतानां सागरस्योर्मयो यथा॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश - ये पाँच महाभूत समस्त प्राणियों के शरीर में विद्यमान रहते हैं। जैसे समुद्र की लहरें उठती और लुप्त होती रहती हैं, वैसे ही ये पाँच महाभूत प्राणियों के शरीर के रूप में जन्म लेते और लुप्त होते रहते हैं।॥3॥ | | | | Earth, water, fire, air and sky—these five great elements are present in the body of all living beings. Just as the waves of the ocean keep rising and disappearing, in the same way these five great elements take birth and disappear in the form of the bodies of living beings.॥ 3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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