vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 247: महाभूतादि तत्त्वोंका विवेचन
»
श्लोक 1
श्लोक
12.247.1
शुक उवाच
अध्यात्मं विस्तरेणेह पुनरेव वदस्व मे।
यदध्यात्मं यथा वेद भगवनृषिसत्तम॥ १॥
अनुवाद
शुकदेवजी बोले- हे प्रभु! महामुनि! अब आप मुझे पुनः विस्तारपूर्वक अध्यात्मज्ञान समझाइए। अध्यात्म क्या है और मैं उसे कैसे जानूँगा?॥1॥
Shukdevji said- O Lord! Great sage! Now again please teach me spiritual knowledge in detail. What is spirituality and how will I know it?॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×