Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.246.5: इस प्रकार समस्त प्राणियों के हृदयरूपी गुफा में छिपे हुए सर्वशक्तिमान ईश्वर का साक्षात्कार इन्द्रियों के द्वारा नहीं होता। केवल ज्ञानी एवं सूक्ष्मात्मा ही अपनी सूक्ष्म एवं श्रेष्ठ बुद्धि के द्वारा उन्हें देख पाते हैं। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सर्वेषु भूतेषु गूढोऽऽत्मा न प्रकाशते।
दृश्यते त्वग्रॺया बुद्धॺा सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभि:॥ ५॥
अनुवाद
इस प्रकार समस्त प्राणियों के हृदयरूपी गुफा में छिपे हुए सर्वशक्तिमान ईश्वर का साक्षात्कार इन्द्रियों के द्वारा नहीं होता। केवल ज्ञानी एवं सूक्ष्मात्मा ही अपनी सूक्ष्म एवं श्रेष्ठ बुद्धि के द्वारा उन्हें देख पाते हैं। ॥5॥
In this way the Almighty God who is hidden in the cave of the heart of all living beings, does not come to light through the senses. Only the wise and subtle souls can see Him through their subtle and superior intellect. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥