vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा
»
श्लोक 20
श्लोक
12.245.20
अहिंसक: सम: सत्यो धृतिमान् नियतेन्द्रिय:।
शरण्य: सर्वभूतानां गतिमाप्नोत्यनुत्तमाम्॥ २०॥
अनुवाद
जो अहिंसक, समदर्शी, सत्यवादी, धैर्यवान, संवेदनशील और समस्त प्राणियों को आश्रय देने वाला है, वह उत्तम मार्ग को प्राप्त करता है ॥20॥
One who is non-violent, equanimous, truthful, patient, sensitive and gives shelter to all living beings, attains the best path. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×