Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.243.21: अतः यदि वे तुम्हारा अपमान भी करें, तो भी तुम्हें क्रोध न करते हुए उसे सदैव सहन करना चाहिए। गृहस्थ धर्म का पालन करने वाले विद्वान पुरुष को निश्चिन्त रहना चाहिए तथा दुःख और थकान को दूर करते हुए निरन्तर धर्म का पालन करते रहना चाहिए॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः यदि वे तुम्हारा अपमान भी करें, तो भी तुम्हें क्रोध न करते हुए उसे सदैव सहन करना चाहिए। गृहस्थ धर्म का पालन करने वाले विद्वान पुरुष को निश्चिन्त रहना चाहिए तथा दुःख और थकान को दूर करते हुए निरन्तर धर्म का पालन करते रहना चाहिए॥ 21॥
Therefore, even if they insult you, you should always tolerate it without being angry. A learned person who follows the household Dharma should remain carefree and keep following the Dharma continuously by overcoming pain and fatigue.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥