श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.241.8 
कर्मणा जायते प्रेत्य मूर्तिमान् षोडशात्मक:।
विद्यया जायते नित्यमव्यक्तं ह्यव्ययात्मकम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कर्म करके मनुष्य मृत्यु के बाद सोलह तत्वों से बने शरीर में जन्म लेता है; परंतु ज्ञान के प्रभाव से जीव सनातन, अव्यक्त, अविनाशी परमात्मा को प्राप्त हो जाता है ॥8॥
 
'By doing Karma, after death a man takes birth in a body made up of sixteen elements; But with the influence of knowledge the living being attains the eternal, unmanifested, imperishable God. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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