श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.241.6 
द्वाविमावथ पन्थानौ यत्र वेदा: प्रतिष्ठिता:।
प्रवृत्तिलक्षणो धर्मो निवृत्तौ च सुभाषित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘प्रवृत्ति से युक्त धर्म और निवृत्ति के उद्देश्य से प्रतिपादित धर्म, ये दो मार्ग हैं जिन पर वेद प्रतिष्ठित हैं।॥6॥
 
‘The Dharma which is characterized by Pravritti and the Dharma which is propounded for the purpose of Nivriti, these are the two paths on which the Vedas are established.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)